एक दिन आरा के ही पकड़ी गाँव से एक व्याहता स्त्री की जन्मकुंडली आई.. सवाल था वह हमेशा बीमार रहती है क्यों.. मैंने कुंडली का अध्ययन किया तो ऐसा कहीं भी योग नहीं था जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि लड़की बीमार रहेगी.
तब मैंने दिमाग़ दौराया.... वर का कुंडली माँगा.. जो नहीं था.. लेकिन ओरिजिनल जन्म व्योरा था जिसके आधार पर कुंडली बनाया और अध्ययन किया.
लड़की मांगलिक नहीं थी.... लेकिन वर मांगलिक था.. यही वजह था लड़की का बीमार पड़े रहने का.हुआ यों था कोलकाता के पंडित जी थे सिर्फ पंडित जी थे.. अब वो जो कहेंगे वो ठीक.. हुआ ऐसा ही था.. पंडित जी को मंगला / मंगली का ज्ञान था नहीं.. वो बोल दिए कि कुंडली ठीक है और विवाह हो गया. टेलीफोनिक बातचीत से स्पष्ट हुआ.. पंडित जी क्षमा याचना करने लगे. आजकल हर कोई स्वयं को ज्योतिष का ज्ञाता ही समझता है.. तो इसके लिए क्या किया जा सकता है. अपना मुंडी तो नहीं फंस रहा चलो जजमान के ही मुंडी फंसा दो.. फंसेगा तभी तो उपाय के नाम पर जो भी हो कमाई तो हो जायगा.
उन्होंने उपाय पूछा तो
मैंने उपाय दिए.... और बतलाया कि जबतक उपाय चलेगा तबतक लड़की और लड़का अलग अलग रहेंगे.
जब लड़की स्वस्थ रहने लगेगी तब भेजना.
लड़की स्वस्थ रहने लगी और वापस ससुराल भेज दी गयी.
आइये कुंडली में कैसे मांगलिक दोष कैसे बनता है.. जानते है -
मंगल दोष- लग्न और राशि पर मंगल हो तो मंगल दोष होता है या राशि और लग्न से 4था, 7वाँ 8वाँ और 12वाँ स्थान पर मंगल बैठा हो तो मंगल दोष लग जाता है.
यहाँ विशेष ध्यान देना है कि राशि और लग्न दोनों से ही मंगल दोष देखा जायगा.